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अर्थव्यवस्था

भारत-मॉरीशस टैक्स संधि में जुड़ा 'मुख्य उद्देश्य परीक्षण' (PPT)

केंद्र ने भारत-मॉरीशस दोहरा कराधान बचाव समझौते (DTAA) में 'मुख्य उद्देश्य परीक्षण' (Principal Purpose Test) जोड़ दिया है। इससे विदेशी निवेश पर टैक्स बचाने के लिए संधि के गलत इस्तेमाल (treaty shopping) का पुराना रास्ता बंद हो गया है।

Jasvin Thinks2026-10-167 मिनट में पढ़ेंअंग्रेज़ी मूल लेख से अनूदित

भारत-मॉरीशस टैक्स संधि में जुड़ा 'मुख्य उद्देश्य परीक्षण' (PPT)
Photo: PIB (Photo ID 17017)

केंद्र ने 14 अक्टूबर 2026 को बताया कि भारत-मॉरीशस टैक्स संधि का संशोधित रूप लागू हो गया है, जिसमें 'मुख्य उद्देश्य परीक्षण' (PPT) जोड़ा गया है। अब अगर किसी सौदे का एक मुख्य मकसद संधि का फायदा उठाना था, तो टैक्स अधिकारी वह फायदा देने से मना कर सकते हैं। 7 मार्च 2024 को हस्ताक्षरित प्रोटोकॉल उन निवेशकों पर निशाना साधता है, जो मुख्य रूप से टैक्स बचाने के लिए पैसा मॉरीशस के रास्ते भेजते हैं।

भारत-मॉरीशस टैक्स संधि में 'मुख्य उद्देश्य परीक्षण' क्या है?

मुख्य उद्देश्य परीक्षण के तहत भारतीय टैक्स अधिकारी भारत-मॉरीशस संधि का फायदा देने से मना कर सकते हैं, अगर किसी सौदे या व्यवस्था का एक मुख्य मकसद यही फायदा पाना था। यह 7 मार्च 2024 को हस्ताक्षरित प्रोटोकॉल से आया है और अक्टूबर 2026 में लागू हुआ। इसका निशाना 'ट्रीटी शॉपिंग' है, यानी मुख्य रूप से टैक्स घटाने के लिए पैसा मॉरीशस के रास्ते भेजना।

टैक्स चोरी या टैक्स से बचने के ज़रिए बिना टैक्स या कम टैक्स के मौके पैदा किए बिना

प्रस्तावना, भारत-मॉरीशस दोहरा कराधान बचाव समझौते में संशोधन करने वाला प्रोटोकॉल (7 मार्च 2024 को हस्ताक्षरित)

क्या हुआ?

केंद्र ने बताया कि दोनों देशों की कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद भारत-मॉरीशस दोहरा कराधान बचाव समझौते (DTAA) का 2024 का प्रोटोकॉल लागू हो गया है। मॉरीशस के मंत्रिमंडल ने 17 जुलाई 2026 को इसे मंज़ूरी दी थी। प्रोटोकॉल संधि की प्रस्तावना बदलता है और अनुच्छेद 27B जोड़ता है, जिसके बाद संधि का फायदा PPT की शर्त पर ही मिलेगा। ऑल इंडिया रेडियो के मुताबिक यह संशोधन 10 अक्टूबर 2026 से लागू है।

लागू होने की तारीख पर रिपोर्टों में फर्क है: इकोनॉमिक टाइम्स के सारांश में अगस्त 2026 बताया गया है, जबकि ऑल इंडिया रेडियो 10 अक्टूबर 2026 बताता है। जिन रिपोर्टों को हमने देखा, उनमें यह भी साफ नहीं कि यह परीक्षण प्रोटोकॉल लागू होने से पहले किए गए निवेश पर भी लागू होगा या नहीं। इनमें से किसी भी बात पर भरोसा करने से पहले अधिसूचित पाठ देख लें।

यह क्यों अहम है

मॉरीशस लंबे समय से भारत आने वाले विदेशी फंड का पसंदीदा रास्ता रहा है। पहले के सुधार नियमों पर आधारित थे: 2016 की 'लाभ की सीमा' (limitation-of-benefits) वाली शर्त और सामान्य कर-बचाव विरोधी नियम (GAAR)। PPT मकसद पर आधारित परीक्षण है, इसलिए अधिकारी किसी ढांचे का सिर्फ कागज़ी रूप नहीं, बल्कि उसके पीछे की असली कारोबारी वजह भी देख सकते हैं। इससे अधिकारियों के हाथ में ज़्यादा फैसला आता है, और उन फंडों के लिए खतरा बढ़ता है जिनकी मॉरीशस में असली मौजूदगी (substance) बहुत कम है। जिन निवेशकों का मॉरीशस में सच में कामकाज है, उन पर ज़्यादा असर नहीं पड़ना चाहिए, लेकिन "मुख्य उद्देश्य" किसे माना जाए, इस पर विवाद ट्रिब्यूनल और अदालतों तक जा सकते हैं।

खबर के पीछे की अवधारणा: ट्रीटी शॉपिंग और PPT

दोहरा कराधान बचाव समझौता दो देशों के बीच टैक्स लगाने का अधिकार बांटता है, ताकि एक ही कमाई पर दो बार टैक्स न लगे। भारत और मॉरीशस ने 1982 में यह समझौता किया। इसमें शेयरों पर हुए मुनाफे (कैपिटल गेन) पर टैक्स सिर्फ उस देश में लगता था, जहां निवेशक रहता है, और मॉरीशस ऐसा कोई टैक्स नहीं लेता था, इसलिए यह मुनाफा पूरी तरह टैक्स से बच जाता था। 2000 के सर्कुलर 789 ने मॉरीशस के टैक्स निवास प्रमाणपत्र को वहां रहने का सबूत मान लिया, और सुप्रीम कोर्ट ने भारत संघ बनाम आज़ादी बचाओ आंदोलन (2003) में इसे सही ठहराया। 2016 के प्रोटोकॉल ने 1 अप्रैल 2017 के बाद खरीदे गए शेयरों के मुनाफे पर टैक्स का अधिकार भारत को दिया, और 31 मार्च 2019 तक कुछ रियायत रखी। 2024 का प्रोटोकॉल OECD की BEPS परियोजना के एक्शन 6 के तहत न्यूनतम मानक जोड़ता है: टैक्स बचाव के खिलाफ संधि की प्रस्तावना और PPT।

पाठ्यक्रम से जुड़ाव

  • GS-III (अर्थव्यवस्था): टैक्स, टैक्स से बचाव और अंतरराष्ट्रीय टैक्स सहयोग
  • GS-III (अर्थव्यवस्था): FDI का आना, उसका रास्ता और विदेश व्यापार
  • GS-II (अंतरराष्ट्रीय संबंध): द्विपक्षीय समझौते और भारत-मॉरीशस संबंध
  • GS-II (शासन): टैक्स और निवेश नीति में न्यायपालिका की भूमिका

PYQ से जुड़ाव

UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2010

प्रश्न: भारत में ब्रिटेन और फ्रांस जैसी कई बड़ी और विकसित अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले मॉरीशस से कहीं ज़्यादा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आता है। क्यों?

  1. FDI पाने के मामले में भारत कुछ देशों को प्राथमिकता देता है
  2. भारत का मॉरीशस के साथ दोहरा कराधान बचाव समझौता है
  3. मॉरीशस के ज़्यादातर नागरिकों की जड़ें भारत से जुड़ी हैं, इसलिए वे भारत में निवेश को सुरक्षित मानते हैं
  4. वैश्विक जलवायु परिवर्तन के खतरे मॉरीशस को भारत में भारी निवेश के लिए प्रेरित करते हैं

उत्तर: भारत का मॉरीशस के साथ दोहरा कराधान बचाव समझौता है

विकल्प (b) सही है। भारत-मॉरीशस DTAA की वजह से निवेशक शेयरों के मुनाफे पर बिना टैक्स दिए मॉरीशस के रास्ते पैसा ला सकते थे, इसलिए मॉरीशस से दर्ज FDI बड़ी अर्थव्यवस्थाओं से कहीं ज़्यादा रहा। नया मुख्य उद्देश्य परीक्षण ठीक इसी रास्ते पर निशाना है। बाकी विकल्पों का नीति या निवेश के आंकड़ों में कोई आधार नहीं है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2018

प्रश्न: विदेशी कंपनियों की ऑनलाइन विज्ञापन सेवाओं पर 6% 'समकारी लेवी' (equalisation levy) लगाने के भारत के फैसले के बारे में कौन-सा/से कथन सही है/हैं? 1. इसे आयकर अधिनियम के हिस्से के रूप में लागू किया गया है। 2. भारत में विज्ञापन सेवाएं देने वाली विदेशी कंपनियां 'दोहरा कराधान बचाव समझौतों' के तहत अपने देश में टैक्स क्रेडिट का दावा कर सकती हैं। नीचे दिए गए कोड से सही उत्तर चुनिए:

  1. केवल 1
  2. केवल 2
  3. 1 और 2 दोनों
  4. न तो 1, न ही 2

उत्तर: न तो 1, न ही 2

विकल्प (d) सही है। समकारी लेवी आयकर अधिनियम में नहीं, बल्कि वित्त अधिनियम, 2016 में है, इसलिए यह आयकर नहीं है और इस पर संधि की राहत लागू नहीं होती। इससे पता चलता है कि अंतरराष्ट्रीय टैक्स के सवालों में DTAA का दायरा क्यों अहम है।

UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2007

प्रश्न: पार्टिसिपेटरी नोट्स (P-Notes) इनमें से किससे जुड़े हैं?

  1. भारत की संचित निधि
  2. विदेशी संस्थागत निवेशक
  3. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम
  4. क्योटो प्रोटोकॉल

उत्तर: विदेशी संस्थागत निवेशक

विकल्प (b) सही है। पार्टिसिपेटरी नोट्स पंजीकृत विदेशी संस्थागत निवेशक उन विदेशी ग्राहकों को जारी करते हैं, जो सीधे पंजीकरण कराए बिना भारतीय बाज़ार में निवेश करना चाहते हैं। यह विदेशी पैसे के घुमावदार रास्ते का पुराना उदाहरण है, और यही चिंता मुख्य उद्देश्य परीक्षण के पीछे भी है।

CAPF 2024

प्रश्न: इनमें से कौन से दो संगठन TIWB (Tax Inspectors Without Borders) का हिस्सा हैं?

  1. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (UNDP) और दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का संगठन (ASEAN)
  2. आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) और ASEAN
  3. UNDP और आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD)
  4. अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) और ASEAN

उत्तर: UNDP और आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD)

विकल्प (c) सही है। Tax Inspectors Without Borders, OECD और UNDP की साझा पहल है, जो विकासशील देशों को टैक्स बचाने वालों की जांच की क्षमता बनाने में मदद करती है। मुख्य उद्देश्य परीक्षण के पीछे वाली BEPS परियोजना भी OECD ही चलाता है।

तालिका से समझें: नियम कैसे सख्त होते गए

भारत-मॉरीशस संधि: सख्ती के तीन दौर

दौरशेयरों के मुनाफे और गलत इस्तेमाल पर नियम
मूल संधि (1982/83)मुनाफे पर टैक्स सिर्फ निवास वाले देश में; मॉरीशस कोई टैक्स नहीं लेता था, इसलिए मुनाफा बिना टैक्स के रहा
2000 और 2003सर्कुलर 789 निवास प्रमाणपत्र को मानता है; सुप्रीम कोर्ट आज़ादी बचाओ आंदोलन मामले में इसे सही ठहराता है
2016 का प्रोटोकॉल1 अप्रैल 2017 के बाद खरीदे गए शेयरों के मुनाफे पर भारत टैक्स लगाता है; 'लाभ की सीमा' वाली शर्त जुड़ी
GAAR (1 अप्रैल 2017 से)घरेलू कर-बचाव विरोधी नियम, टैक्स बचाने की गलत व्यवस्थाओं को नज़रअंदाज़ कर सकता है
2024 का प्रोटोकॉल (अक्टूबर 2026 में लागू)टैक्स बचाव के खिलाफ संधि की प्रस्तावना और मुख्य उद्देश्य परीक्षण (अनुच्छेद 27B)

कड़ियां जोड़ें

  1. 1982: भारत और मॉरीशस DTAA पर हस्ताक्षर करते हैं; शेयरों के मुनाफे पर टैक्स सिर्फ निवास वाले देश में।
  2. 2000 और 2003: सर्कुलर 789 और आज़ादी बचाओ आंदोलन मामला मॉरीशस के निवास प्रमाणपत्र को निर्णायक बना देते हैं।
  3. 2012: वित्त अधिनियम, 2012 से GAAR आता है, जो 1 अप्रैल 2017 से लागू होता है।
  4. 2016: एक प्रोटोकॉल भारत को शेयरों के मुनाफे पर टैक्स लगाने का अधिकार देता है और 'लाभ की सीमा' वाली शर्त जोड़ता है।
  5. 7 मार्च 2024: नया प्रोटोकॉल मुख्य उद्देश्य परीक्षण और संशोधित प्रस्तावना जोड़ता है।
  6. 17 जुलाई 2026: मॉरीशस का मंत्रिमंडल इसे मंज़ूरी देता है।
  7. 14 अक्टूबर 2026: केंद्र बताता है कि PPT लागू हो गया है।
  8. आगे: अधिकारी यह परीक्षण कैसे लागू करेंगे, इस पर दिशानिर्देश, और फंड मॉरीशस में अपनी इकाइयों को असली कामकाज के साथ कैसे दोबारा तैयार करते हैं।

और पढ़ें

परीक्षा के लिए मुख्य बातें

  • मुख्य उद्देश्य परीक्षण: अगर किसी व्यवस्था का एक मुख्य मकसद संधि का फायदा पाना था, तो वह फायदा नहीं मिलेगा।
  • प्रोटोकॉल पर 7 मार्च 2024 को हस्ताक्षर हुए; मॉरीशस के मंत्रिमंडल ने 17 जुलाई 2026 को मंज़ूरी दी; भारत ने 14 अक्टूबर 2026 को इसके लागू होने की जानकारी दी।
  • 2016 के प्रोटोकॉल से 1 अप्रैल 2017 के बाद खरीदे गए शेयरों के मुनाफे पर भारत में टैक्स लगने लगा।
  • GAAR 1 अप्रैल 2017 से लागू है; PPT संधि के स्तर पर, मकसद पर आधारित परीक्षण है।
  • PPT, OECD BEPS एक्शन 6 के मुताबिक है, जो संधि के गलत इस्तेमाल के खिलाफ न्यूनतम मानक है।

परीक्षा की दृष्टि से

प्रारंभिक परीक्षा में DTAA, ट्रीटी शॉपिंग और GAAR का मतलब, और खास प्रोटोकॉल के साल पूछे जा सकते हैं। मुख्य परीक्षा में पूछा जा सकता है: "क्या मॉरीशस का रास्ता बंद करने से विदेशी निवेश को नुकसान होता है, और भारत को टैक्स बचाने और निवेशकों को भरोसा देने के बीच संतुलन कैसे बनाना चाहिए?" सबूत के रूप में 1982 से 2024 तक की कहानी, नियम-आधारित से मकसद-आधारित परीक्षण की ओर बदलाव, और असली कामकाज की शर्त का इस्तेमाल कीजिए।

संभावित प्रश्न

अभ्यास प्रश्न

प्रश्न: भारत-मॉरीशस टैक्स संधि के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मुख्य उद्देश्य परीक्षण के तहत संधि का फायदा रोका जा सकता है, अगर किसी व्यवस्था का एक मुख्य मकसद वही फायदा पाना था। 2. 2016 के प्रोटोकॉल से 1 अप्रैल 2017 के बाद खरीदे गए शेयरों का मुनाफा भारत में टैक्स के दायरे में आया। 3. संधि मॉरीशस को अपने निवासियों की भारत से होने वाली सभी पूंजीगत कमाई पर टैक्स लगाने देती है। ऊपर दिए गए कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?

  1. केवल 1
  2. केवल 1 और 2
  3. केवल 2 और 3
  4. 1, 2 और 3

उत्तर: केवल 1 और 2

कथन 1 और 2 सही हैं। PPT, 2024 के प्रोटोकॉल से जुड़ा गलत इस्तेमाल रोकने वाला परीक्षण है, और 2016 के प्रोटोकॉल ने 1 अप्रैल 2017 के बाद खरीदे गए शेयरों के मुनाफे पर टैक्स का अधिकार भारत को दिया। कथन 3 गलत है: बदलाव भारत में टैक्स लगाने की ओर था, मॉरीशस में नहीं।

स्रोत और आगे पढ़ें

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